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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में लोक प्रशासन शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ, HP बोर्ड स्कूल भी कराएंगे ज्वाइन

लोक प्रशासन शिक्षकों की नियुक्ति पर शिक्षा विभाग ने स्थिति साफ की
HP बोर्ड से संबद्ध स्कूल भी नियुक्त शिक्षकों को ज्वाइन करा सकेंगे
30 हजार रुपये मानदेय पर पांच साल के लिए हुई हैं नियुक्तियां


शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में लोक प्रशासन विषय के शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर चल रहा असमंजस अब दूर हो गया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल इस आधार पर किसी नियुक्त शिक्षक को कार्यभार ग्रहण करने से नहीं रोका जा सकता कि संबंधित विद्यालय हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध है। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों और विद्यालय प्रमुखों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

निदेशालय के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश राजकीय चयन आयोग हमीरपुर की सिफारिश और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद लोक प्रशासन विषय के शिक्षकों की नियुक्तियां विधिवत की गई हैं। इसलिए नियुक्ति आदेश प्राप्त शिक्षक को निर्धारित विद्यालय में दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कार्यभार ग्रहण करवाना अनिवार्य होगा।

स्कूल के बोर्ड से संबद्ध होने को ज्वाइनिंग रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता

शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में सबसे अहम बात यह कही गई है कि किसी शिक्षक की नियुक्ति को सिर्फ इसलिए नहीं रोका जा सकता कि संबंधित सरकारी स्कूल एचपी बोर्ड से संबद्ध है।

दरअसल, इन नियुक्तियों को लेकर कुछ विद्यालयों में यह असमंजस सामने आया था कि लोक प्रशासन विषय के लिए नियुक्त शिक्षक केवल सीबीएसई से संबद्ध सरकारी विद्यालयों में ही तैनात किए जाने हैं या एचपी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में भी उन्हें कार्यभार दिया जा सकता है।

अब विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन विद्यालयों में संबंधित विषय की पढ़ाई हो रही है और जो नियुक्ति की उपयोजना के दायरे में आते हैं, वहां नियुक्त शिक्षक को ज्वाइन कराया जा सकता है। विद्यालय का एचपी बोर्ड से संबद्ध होना अपने आप में ज्वाइनिंग रोकने का कारण नहीं होगा।

सीबीएसई पाठ्यक्रम में विषय नहीं, इसलिए एचपी बोर्ड स्कूलों में दी गई तैनाती

इन शिक्षकों की नियुक्ति सरकारी विद्यालयों में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के लिए बनाई गई विशेष उपयोजना के तहत की गई है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण पेच यह था कि सीबीएसई के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में लोक प्रशासन विषय उपलब्ध नहीं है।

इसी वजह से लोक प्रशासन के लिए नियुक्त शिक्षकों को फिलहाल उन सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में तैनात किया गया है, जहां यह विषय पढ़ाया जा रहा है। इनमें ऐसे विद्यालय भी शामिल हैं जो वर्तमान में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं।

विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को उपलब्ध विषय के अनुसार शिक्षक उपलब्ध करवाना है। इसलिए केवल बोर्ड की संबद्धता के आधार पर नियुक्ति को रोकना विभागीय निर्देशों के अनुरूप नहीं होगा।

पांच साल की अवधि के लिए नियुक्ति, 30 हजार रुपये मासिक मानदेय

लोक प्रशासन विषय के इन शिक्षकों की नियुक्तियां गैर-मंजूर पदों के विरुद्ध की गई हैं। नियुक्ति की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है।

इन शिक्षकों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह का निश्चित मानदेय दिया जाएगा। यानी नियुक्ति नियमित स्वीकृत पदों पर नहीं बल्कि संबंधित विशेष उपयोजना के तहत तय शर्तों के आधार पर की गई है।

नियुक्ति के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया संबंधित विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की है। इसी को लेकर विभाग ने सभी अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करते हुए ज्वाइनिंग प्रक्रिया में अनावश्यक बाधा नहीं डालने के निर्देश दिए हैं।

दस्तावेजों का सत्यापन होगा, इसके बाद तत्काल ज्वाइनिंग

शिक्षा निदेशालय ने जिला उपनिदेशकों और विद्यालय प्रमुखों को निर्देश दिया है कि नियुक्त शिक्षक के नियुक्ति आदेश और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए। दस्तावेज सही पाए जाने के बाद शिक्षक को उसी विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करवाया जाए, जहां उसकी नियुक्ति की गई है।

जिला स्तर पर अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के सभी विद्यालय प्रमुखों को इन निर्देशों की जानकारी तुरंत देने को कहा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमों को लेकर किसी तरह की गलतफहमी के कारण नियुक्त शिक्षक विद्यालय में ज्वाइन करने से वंचित न रहें।

शिक्षा निदेशालय ने अधिकारियों को दिए कड़ाई से पालन के निर्देश

निदेशालय ने साफ किया है कि यदि कोई विद्यालय संबंधित विशेष उपयोजना के दायरे में आता है और सक्षम प्राधिकारी की ओर से नियुक्ति आदेश जारी किया गया है, तो केवल विद्यालय के एचपी बोर्ड से संबद्ध होने के आधार पर शिक्षक को ज्वाइनिंग देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

निदेशक आशीष कोहली ने सभी संबंधित अधिकारियों और संस्थान प्रमुखों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इससे लोक प्रशासन विषय के नवनियुक्त शिक्षकों के सामने बनी स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।

हाईकोर्ट के आदेश और सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षक नियुक्तियों के बीच अहम कदम

हिमाचल में सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का मामला भी हाल में चर्चा में रहा है। ऐसे में लोक प्रशासन विषय के शिक्षकों की तैनाती को लेकर शिक्षा विभाग का यह स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विभाग का रुख अब स्पष्ट है कि नियुक्ति आदेश और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद संबंधित शिक्षक को निर्धारित स्कूल में कार्यभार ग्रहण करवाने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। इससे उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें स्कूल की बोर्ड संबद्धता को लेकर ज्वाइनिंग में अड़चन का सामना करना पड़ रहा था।